बुधवार, 31 मई 2017

मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया || Meri devi maiya ki bholi re suratiya

मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।
मैया के मांगों में बेंदी भी सोहे
सेन्धुला लुभाय हे मोरी मैया।
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।


मैया के कानों में कुण्डल भी सोहे
झुमका लुभाय हे मोरी मैया
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।

मैया के गले मे हार भी सोहे
गजला लुभाय हे मोरी मैया
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।

मैया के कमर में करधन भी सोहे
गुछना लुभाय हे मोरी मैया
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।

मैया के हाथों में चूड़ी भी सोहे
कंगना लुभाय हे मोरी मैया।
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।

मैया के पैरों में पायल भी सोहे
बिछुआ लुभाय हे मोरी मैया
मेरी देवी मैया की भोली रे सुरतिया
मनवा लुभाय हे मोरी मैया।


सोमवार, 29 मई 2017

सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया || Sapne me darshan de gayi ho

सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया
मैया दुवारे एक अंधा पुकारे-2
अंधे को नैना दे गयी हो मैहर वाली मैया
सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया

मैया दुवारे एक लंगड़ा पुकारे -2
लंगड़े को पैर दे गयी हो मैहर वाली मैया
सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया

मैया दुवारे एक कन्या पुकारे -2
कन्या को वर दे गयी हो मैहर वाली मैया
सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया

मैया दुवारे एक निर्धन पुकारे -2
निर्धन को धन दे गयी हो मैहर वाली मैया
सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया

मैया दुवारे एक बालक पुकारे - 2
बालक को विद्या दे गयी हो मैहर वाली मैया
सपने मे दरसन दे गयी हो मैहर वाली मैया


रविवार, 28 मई 2017

गणपति को लग गयी नजरिया हो || Ganapati ko lag gayi najariya ho

गणपति को लग गयी नजरिया हो
गौरा काजल लगाय दो
गणपति को देखन शंकर जी आये
गौरा की लग गयी नजरिया हो
गौरा काजल लगा दो

गणपति को देखन विष्णु जी आये
लक्ष्मी की लग गयी नजरिया हो
गौरा काजल लगा दो

गणपति को देखन कृष्णा जी आये
राधा की लग गयी नजरिया हो
गौरा काजल लगा दो

गणपति को देखन राम जी आये
सीता की लग गयी नजरिया हो
गौरा काजल लगा दो।


शनिवार, 27 मई 2017

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही || Shiv Ji Bolo To Sahi

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं गंगा बन जाउंगी
गंगा बन जाउंगी जटा में रम जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं चन्दा बन जाउंगी
चन्दा बन जाउंगी मस्तक में रम जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं बिच्छू बन जाउंगी
बिच्छू बन जाउंगी कानों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं सर्प बन जाउंगी
सर्प बन जाउंगी गले से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं बाघाम्बर बन जाउंगी
बाघाम्बर बन जाउंगी अंगों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं डमरू बन जाउंगी
डमरू बन जाउंगी हाथों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी
आप नहीं बोलेंगे तो मैं त्रिशूल बन जाउंगी
त्रिशूल बन जाउंगी तो हाथों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही
आपकी शरण में दासी कब से खड़ी


शुक्रवार, 26 मई 2017

जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी || Jay Bhole Bhandari baba jay bhole bhandari


जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी
कौन सी तपस्या बाबा गंगा ने कीनी
अपने जटा में बाबा उनको जगह दीन्ही

जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी
कौन सी तपस्या बाबा चन्दा ने कीन्ही
अपनी मस्तक में बाबा उनको जगह दीन्हीं

जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी
कौन सी तपस्या बाबा बिच्छू ने कीन्ही
अपने कानों में बाबा उनको जगह दीन्ही

जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी
कौन सी तपस्या बाबा नन्दी कीन्ही
अपने वाहन में बाबा उनको जगह दीन्ही

जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी
कौन सी तपस्या बाबा गणपति ने कीन्ही
अपनी गोदी में बाबा उनको जगह दीन्ही
जय भोले भण्डारी बाबा जय भोले भण्डारी

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

पवन उड़ा के ले गयी हो मैया की चुनरिया

पवन उड़ा के ले गयी हो मैया की चुनरिया
उड़ उड़ चुनरी विन्ध्याचल में पहुँची,
भक्तों के मन को भाय गयी हो, मैया की चुनरिया।।
उड़ उड़ चुनरी वृन्दावन में पहुँची,
ललिता के मन को भाय गयी हो, मैया की चुनरिया।।
उड़ उड़ चुनरी हिमांचल में पहुँची,
गौरा के मन को भाय गयी हो, मैया की चुनरिया।।
उड़ उड़ चुनरी मथुरा में पहुँची,
राधा के मन को भाय गयी हो, मैया की चुनरिया।।

(तर्ज - चलत मुसाफिर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया)

इस ब्लाग का निर्माण एवं सज्जा हिंमांशु पाण्डेय द्वारा की गयी है himanshu.pandey.hp@gmail.com