** भारतीय लोकजीवन में सोहर गीत खुशियों और पारिवारिक उत्सवों का प्रतीक हैं. भोजपुरी, अवधी और मैथिली क्षेत्रों में गाए जाने वाले ये लोकगीत रिश्तों के बीच की हंसी-ठिठोली, प्यार और मीठी नोक-झोंक को दर्शाते हैं. एक लोकप्रिय भोजपुरी सोहर के जरिए ननद-भौजाई, देवर-भाभी, सास-बहू और जेठानी के खट्टे-मीठे रिश्तों को प्राकृतिक उदाहरणों के साथ हास्य-व्यंग्य शैली में पिरोया गया है. ये गीत न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई, पारिवारिक एकता और रिश्तों की मिठास को भी बनाए रखते हैं. ** तो आइये अब इस प्रसिद्ध सोहर गीत का आनन्द लेते हैं। सोहर के बोल इस प्रकार हैं - *** जइसे तलवा में लड़ेइआ चमकय ननदी। अरे ओइसे चमकय घरवाँ में ससुरुआ हमरी ननदी। ** जइसे बदरवा में बिजुलिआ चमकय ननदी, अरे ओइसे चमके घरवा में भसुरुआ हमरी ननदी। ** जइसे जंगलवा में हरिनवाँ छरके ननदी। अरे ओइसे छरके घरवाँ में देवरवा, छोटी ननदी। ** तीसिआ के तेलवा जरे हो छोटी ननदी, अरे ओइसे जरे घरवाँ में ससुइआ, छोटी ननदी। ** जइसे तउवा पर रोटिआ फुले ननदी, अरे ओइसे फूले घरवाँ में जेठनियाँ, छोटी ननदी। ** जइसे जंगलवा में बिछिआ टुपके...
यह लोकगीतों को एक माला में पिरोने का प्रयास है। परम्परा से हमारे लोकगीत पीढ़ी दर पीढ़ी सतत प्रवाहमान रहे हैं और राग, लय एवं भावों की समृद्धि सहेजे हुए हैं। यदि आपके पास भी लोक-गीत-माला में पिरोने हेतु कुछ मोती हों तो उन्हें ब्लॉगर को उपलब्ध कराकर कृतार्थ करें।